आशा से प्रेम तक
बसंत की सुहानी शाम थी। पूरे गांव में नवविवाहित दंपतियों के सम्मान में एक सुंदर समारोह आयोजित किया गया था। हर दंपति से कहा गया कि वे अपने जीवनसाथी के लिए अपने मन की बात कहें।
सबसे पहले आशा उठी। उसने अपने पति जीवन का हाथ थामकर मुस्कुराते हुए कहा,
"आशा ही जीवन है। यदि आशा न हो तो जीवन अधूरा है। जैसे तुम मेरे जीवन हो, वैसे ही मैं तुम्हारी हर उम्मीद की रोशनी बनकर हमेशा साथ रहूंगी।"
सभी ने तालियों से उनका स्वागत किया।
फिर कविता अपने पति प्रेम के पास आई और मुस्कुराकर बोली,
"कविता से ही आपके जीवन में प्रेम है। शब्दों में भाव हों, तभी प्रेम खिलता है।"
इतना कहकर उसने एक कविता सुनाई—
"तुम ही मेरे चाँद हो और तुमसे ही मेरे जीवन में चाँदनी आई है।"
प्रेम की आँखों में खुशी के आँसू चमक उठे।
इसके बाद दिया ने एक सुंदर दीप जलाया और हाथ जोड़कर कहा,
"मैंने इस आशा के साथ अपने घर में दिया जलाया है कि मेरी प्रेम पाने की आकांक्षा पूरी हो और हमारे जीवन में प्रेम ही प्रेम बरसे।"
पूरा वातावरण दीपों की रोशनी और प्रेम की ऊष्मा से भर गया।
अब मनोरमा की बारी थी। उसने अपने पति का हाथ थामा, चारों ओर फैले मनोरम दृश्य को देखा और प्रेम से बोली,
"पतिदेव, **तुम ही मेरे आकाश हो, तुम ही मेरे जीवन हो, तुम ही मेरी खुशी हो। तुमसे ही मेरे चेहरे में मुस्कान है। तुम्हारे कारण ही मेरे जीवन में आशा की किरण आई है। मैं तुम्हारी लक्ष्मी और तुम मेरे राजा हो। मेरे कोमल बदन और मेरी मधुर वाणी से तुम्हारे जीवन की शोभा बढ़ गई है। मैं तुम्हारे जीवन की कविता और तुम मेरे कवि हो। मेरी हमेशा से यही भावना है कि तुम अपने जीवन के सभी लक्ष्यों की सीमा पार करते रहो और निरंतर प्रयास करते रहो, ताकि हमारे परिवार में हमेशा खुशी बरकरार रहे।"
उसके शब्द सुनकर हर किसी की आँखें नम हो गईं।
फिर माला ने अपने पति के गले में फूलों की माला डालते हुए कहा,
"मैंने तुम्हारे नाम की माला पहनी है। यह केवल फूलों की माला नहीं, बल्कि मेरे प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।"
इसके बाद शोभा ने अपने पति पृथ्वी की ओर देखकर मुस्कुराते हुए कहा,
"मैं ही आपके जीवन की शोभा हूँ, और आप मेरे जीवन का आधार हैं। जैसे पृथ्वी सबको संभालती है, वैसे ही आपने मुझे हर कठिन समय में संभाला है।"
अब भावना अपने पति के पास आई और बोली,
"मेरी भावना है कि तुम हर परिस्थिति में सच्चाई, प्रेम और धैर्य का साथ निभाओ। तुम्हारी हर सफलता में मैं तुम्हारे साथ खड़ी रहूँगी।"
इसके बाद प्रीति ने अपने पति से कहा,
"हमारे रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत प्रीति, विश्वास और अपनापन है। जब तक यह प्रीति बनी रहेगी, हमारा प्रेम कभी कम नहीं होगा।"
फिर प्रेमा ने अपने पति प्रेम से मुस्कुराकर कहा,
"तुम्हारे नाम में ही प्रेम है, और मेरे नाम में भी। इसलिए हमारा रिश्ता केवल नामों का नहीं, बल्कि दो धड़कनों का मिलन है।"
अब खुशबू उठी और हँसते हुए बोली,
"मेरे कारण से ही हमारे घर में इतनी अच्छी खुशबू आई है, लेकिन सच तो यह है कि तुम्हारे प्रेम ने ही इस खुशबू को हमेशा महकाए रखा है।"
सभी के चेहरे खिल उठे।
तभी मुस्कान मुस्कराते हुए अपने पति के सामने आई और बोली,
"मैंने तुम्हारे लिए एक कविता लिखी है।"
कविता समाप्त होते ही उसने हँसकर कहा,
"मेरी लिखी कविता सुनकर आपके चेहरे पर मुस्कान आ गई, यही मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।"
अंत में आकांक्षा ने अपने पति का हाथ थामकर प्रेम से कहा,
"मेरी आकांक्षा है कि तुम मुझे उस सीमा से पार ले जाओ, जहाँ इतना आनंद हो कि आगे कोई खुशी की सीमा ही न रहे। मैं चाहती हूँ कि हमारा प्रेम हर दिन नई ऊँचाइयाँ छुए और जीवन का हर पल यादगार बन जाए।"
रात गहराने लगी। चाँदनी पूरे आँगन में बिखर चुकी थी। दीपक की लौ, फूलों की खुशबू, मधुर कविताएँ और प्रेम से भरे शब्द वातावरण को स्वर्ग जैसा बना रहे थे।
उस दिन सभी ने समझ लिया कि जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति धन नहीं, बल्कि आशा, प्रेम, भावना, प्रीति, मुस्कान, खुशबू, कविता और विश्वास हैं। इन्हीं से हर घर स्वर्ग बनता है, हर रिश्ता मजबूत होता है और हर जीवन प्रेम से भर उठता है।

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